हक की आवाज़… सेवा का जुनून… बाराबंकी का भरोसा – सैयद रिज़वान मुस्तफा




उमेश श्रीवास्तव 

बाराबंकी की मिट्टी ने हमेशा ऐसे किरदार पैदा किए हैं, जो अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीते हैं। आज उसी कड़ी में एक नाम पूरे जिले में उम्मीद की रोशनी बनकर उभर रहा है—सैयद रिज़वान मुस्तफा।


वो सिर्फ एक वरिष्ठ पत्रकार या सेव वक्फ इंडिया मिशन के वाइस प्रेसिडेंट नहीं हैं, बल्कि उन बेबस आवाज़ों की ताकत हैं, जिनकी सुनवाई अक्सर कहीं नहीं होती। उनकी जिंदगी एक मिशन है—जुल्म के खिलाफ खड़े होना, और मजलूम को उसका हक दिलाना।


गांव की पगडंडियों से लेकर शहर की चौपाल तक, आज हर जगह एक ही चर्चा है—“रिज़वान मुस्तफा जैसा सेवक अगर विधायक बने, तो हालात बदल सकते हैं।”

उनकी सादगी, उनकी साफ नीयत और इंसाफ के लिए उनकी बेखौफ लड़ाई ने लोगों के दिलों में गहरी जगह बना ली है।


वो बुजुर्गों के पास बैठकर उनकी दुआ लेते हैं, नौजवानों को रास्ता दिखाते हैं और बच्चों के सिर पर हाथ रखकर उनका भविष्य संवारने की बात करते हैं। उनके लिए कोई छोटा-बड़ा नहीं, हर इंसान बराबर है—यही उनकी असली ताकत है।


गरीब किसान की जमीन पर जब कोई नज़र डालता है, तो सबसे पहले जो आवाज़ उठती है, वो रिज़वान मुस्तफा की होती है। उनकी कलम बिकती नहीं, झुकती नहीं—सिर्फ सच लिखती है।

और यही सच आज उनके समर्थन को जनसैलाब में बदल रहा है।


राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि AIMIM, आम आदमी पार्टी और भीम पार्टी जैसे दल भी उन्हें एक मजबूत चेहरे के रूप में देख रहे हैं। अगर गठबंधन की तस्वीर साफ होती है, तो बाराबंकी की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर सकती है।


उनकी बढ़ती लोकप्रियता ने उन ताकतों की नींद उड़ा दी है, जो सालों से गरीबों के हक पर कब्जा जमाए बैठे थे—चाहे वो भू-माफिया हों, ड्रग माफिया या वक्फ संपत्तियों के लुटेरे।


क्योंकि उन्हें पता है—अगर ये सेवक सत्ता तक पहुंचा, तो हिसाब जरूर होगा।


सैयद रिज़वान मुस्तफा भाई कोई सपना नहीं, एक भरोसा हैं…

एक ऐसा भरोसा, जो बाराबंकी के हर घर, हर दिल में बसता जा रहा है।

और शायद यही भरोसा कल एक नई सियासत की नींव बनेगा—जहां कुर्सी नहीं, सेवा सबसे ऊपर होगी।

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